
जुन्नारदेव: भ्रष्टाचार की ‘स्ट्रीट लाइट’ से रोशन हुईं पंचायतें, शासन को लगी 32 लाख की चपत; जनपद के जिम्मेदारों की मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
विशेष रिपोर्ट: नियम विरुद्ध मद परिवर्तन और बिजली चोरी के जुर्माने ने खोखला किया पंचायतों का खजाना; अब दोषियों की निजी संपत्ति से वसूली की उठ रही मांग।
जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा)। संतोष आमरे ……..जनपद पंचायत जुन्नारदेव की ग्राम पंचायतों में 5वें वित्त आयोग की राशि के बंदरबांट का एक ऐसा खेल उजागर हुआ है, जिसने न केवल वित्तीय शुचिता की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि जनपद स्तर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
अंधेरे में जनपद प्रशासन: मॉनिटरिंग या मौन सहमति?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी (Monitoring) पर उठ रहा है।
- नियमों के विरुद्ध ‘मद परिवर्तन’ कर राशि का आहरण कैसे हो गया?
- बिना ‘वर्क आर्डर’ के ठेकेदारों को लाखों का भुगतान होता रहा, लेकिन जनपद के तकनीकी और प्रशासनिक अमले ने इस पर रोक क्यों नहीं लगाई?
- क्या यह माना जाए कि पंचायतों में हो रहे इस संगठित भ्रष्टाचार को उच्च अधिकारियों का मूक संरक्षण प्राप्त था? जानकारों का कहना है कि यदि जनपद स्तर पर समय रहते फाइलों और जमीनी कार्यों की समीक्षा की जाती, तो शासन को लाखों रुपये के राजस्व की हानि नहीं होती।
बिजली चोरी का कलंक: विकास की राशि ‘जुर्माने’ में स्वाहा
पंचायतों और ठेकेदारों की जुगलबंदी का आलम यह रहा कि बिना वैध कनेक्शन के ही बिजली का उपयोग किया गया। विद्युत विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में की गई कार्रवाई ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। जनपद की विभिन्न पंचायतों पर लगभग 32 लाख रुपये का जुर्माना थोपा गया है। यह वह राशि है जो गांव की नालियों, स्कूलों और स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च होनी थी, लेकिन अब सरपंच-सचिवों की ‘नूराकुश्ती’ के कारण जुर्माने में व्यय होगी।
प्रमुख मांग: दोषियों की जेब से हो 32 लाख की वसूली
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से दोटूक मांग की है कि बिजली चोरी के कारण अधिरोपित 32 लाख रुपये की शास्ति (जुर्माना) का भुगतान सरकारी खजाने या पंचायत की राशि से कतई न किया जाए। - निजी वसूली की मांग: चूंकि यह जुर्माना सरपंच और सचिवों की घोर लापरवाही और आपराधिक कृत्य का परिणाम है, इसलिए इस राशि की वसूली सीधे तौर पर संबंधित दोषी सरपंचों और सचिवों की निजी चल-अचल संपत्ति से की जानी चाहिए।
- उत्तरदायित्व का निर्धारण: जनता का पैसा बिजली चोरी के जुर्माने में भरने के बजाय, इसे वसूल कर विकास कार्यों में लगाया जाए।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की गुहार
मामले की गंभीरता को देखते हुए छिंदवाड़ा कलेक्टर से मांग की गई है कि एक विशेष जांच दल गठित कर जुन्नारदेव जनपद के उन सभी जिम्मेदारों को चिन्हित किया जाए जिनकी लापरवाही से यह घोटाला फला-फूला। बिना वर्क आर्डर भुगतान और अवैध मद परिवर्तन करने वालों पर ‘गबन’ का मामला दर्ज कर उन्हें तत्काल सेवा से पृथक करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

