
कलयुगी नाना को उम्रकैद: नाबालिग नातिन से दुष्कर्म मामले में न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला
छिंदवाड़ा/परासिया। संतोष आमरे.….समाज को झकझोर देने वाले एक जघन्य मामले में परासिया के माननीय अपर सत्र न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपनी ही 14 वर्षीय नाबालिग नातिन के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी नाना को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने इसे ‘चिह्नित जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण’ की श्रेणी में रखते हुए आरोपी पर कुल 22,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
मामला और सजा का विवरण
विशेष लोक अभियोजक श्रीमती मर्सकोले ने बताया कि आरोपी फागलाल उइके (उम्र 58 वर्ष) के विरुद्ध धारा 506 भादवि और धारा 5(एल)(एन)(जे)(II)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज था। माननीय न्यायाधीश श्री गौतम कुमार गुजरे ने साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आरोपी को दोषी पाते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:
पॉक्सो एक्ट के तहत: शेष प्राकृतिक जीवन पर्यंत (अंतिम सांस तक) आजीवन कारावास और 20,000 रुपये अर्थदंड।
धारा 506 (धमकाने) के तहत: 2 वर्ष का कठोर कारावास और 2,000 रुपये अर्थदंड।
रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना
घटना का संक्षिप्त विवरण हृदय विदारक है। नवंबर 2022 में डायल 100 को सूचना मिली थी कि एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की ने बच्चे को जन्म दिया है। जांच में खुलासा हुआ कि करीब एक साल पहले जब पीड़िता के माता-पिता उसे और उसकी जुड़वा बहन को नाना के घर छोड़ आए थे, तब आरोपी नाना ने सोते समय पीड़िता के साथ डरा-धमकाकर गलत काम किया।
आरोपी ने किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। वह लगातार पीड़िता के साथ दुष्कर्म करता रहा, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई। डर के मारे पीड़िता ने यह बात किसी को नहीं बताई। जब वह अपने घर लौटी, तब अचानक प्रसव होने के बाद इस घिनौने कृत्य का खुलासा हुआ।
पुलिस और अभियोजन की तत्परता
थाना रावनवाड़ा पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल रिपोर्ट दर्ज की। उपनिरीक्षक श्री मुकेश डोंगरे द्वारा मामले की विवेचना की गई और पुख्ता सबूत न्यायालय में पेश किए गए। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी श्री रतन सिंह धुर्वे द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों को स्वीकार करते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा प्रदान की है, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए।
