
NMMS ऐप बना मजाक: छिंदवाड़ा के जामई ब्लॉक में सुबह महिला और शाम को पुरुष की फोटो अपलोड, सरकारी धन की बंदरबांट की खुली छूट”
जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा): जनपद पंचायत जुन्नारदेव के ग्राम पंचायत बिन्दरई में मनरेगा कार्यों में पारदर्शिता के लिए लागू किए गए ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम’ (NMMS) के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। ताजा मस्टर रोल (संख्या 62770 दिनांक 31-03-2026) के विश्लेषण में एक ऐसा मामला सामने आया है जो न केवल तकनीकी खामी या मॉनिटरिंग का अभाव ही नही बल्कि ग्राम पंचायतों में व्याप्त खुले भ्रष्टाचार की ओर भी संकेत करता है।
सुबह गंगा, शाम को ‘अदृश्य’ बदलाव
प्राप्त मस्टर रोल के अनुसार, ‘परकोलेशन टैंक निर्माण कार्य भेसई नदी के पास’ नामक कार्यस्थल पर 31 मार्च 2026 को काम चल रहा था। उपस्थिति पंजी के अनुसार:
- सुबह की हाजिरी (11:00 AM): मस्टर रोल में केवल एक महिला श्रमिक ‘गंगा’ (Job Card No: MP-36-005-096-001/60) को उपस्थित दर्शाया गया है। NMMS ऐप पर अपलोड की गई फोटो में एक महिला स्पष्ट रूप से नजर आ रही है।
- शाम की हाजिरी (06:04 PM): नियमों के अनुसार शाम को भी उसी श्रमिक की फोटो अपलोड होनी चाहिए। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, शाम के समय अपलोड की गई फोटो (Group Photo 2) में एक पुरुष की छवि दिखाई दे रही है, जबकि मस्टर रोल में केवल महिला श्रमिक गंगा ही ‘प्रेजेंट’ दर्ज है। शेष सभी 9 श्रमिक उस दिन अनुपस्थित दिखाए गए हैं।
बिंदुवार समझें फर्जीवाड़े की आशंका - श्रमिक का लिंग परिवर्तन? दस्तावेजों में पूरे दिन केवल एक महिला (गंगा) ही उपस्थित रही, तो शाम की फोटो में पुरुष कैसे आया? यह सीधे तौर पर फर्जी फोटो अपलोड करने का मामला प्रतीत होता है।
- स्थान की गोपनीयता: हालांकि फोटो के जियो-कोऑर्डिनेट्स लगभग समान हैं लेकिन व्यक्ति का बदल जाना मेट (Mate) और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
- शासन के आदेश का खुल्ला उल्लंघन:शासन के आदेशानुसार NMMS (नरेगा मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) में जाँच का Monitoring Pyramid पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। ग्राम पंचायत स्तर पर GRS/स्टाफ द्वारा 100% दैनिक फोटो व उपस्थिति की जाँच अनिवार्य है, लेकिन फिर भी ऐसी त्रुटि व भर्ष्टाचार ग्राम पंचायत कर्मियों की मिलीभगत को दर्शाती है
कौन है जिम्मेदार?
इस मामले में ग्राम पंचायत सचिव रोजगार सहायक सभी मेट बबलू उइके’ जिसके द्वारा ऐप पर लिया गया है। शाम की फोटो में जिस ‘जादुई’ बदलाव को देखा गया, उसने प्रशासन के ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ के दावों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर भर्ष्टाचार की किस ‘जड़ी-बूटी’ के प्रभाव से सुबह की महिला शाम को पुरुष में तब्दील हो गई।

